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क्रांतिगुरू लहुजी सालवे- मातंग समाज

लहुजी साल्वे संतोष थोराट

भारत के प्रथम, क्रांतिगुरू लहुजी सालवे
जन्म: १४ नवंबर १७९४
निर्वाण: १७ फरवरी १८८१

थोर समाजसुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले इनके गुरू, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले इनके अंगरक्षक, महात्मा ज्योतिबा फुले- क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले इन्होने देश में लडकियो के लिए, दलित, आदिवासी, ओबीसी,मुस्लिम समाज के लिए सर्वप्रथम स्कुल सुरू करके शिक्षा देने का कार्य किया और उनके इस महान कार्य में हरसंभव मदद और संरक्षण देनेवाले शिक्षा के प्रसार-प्रचारक, फुलेजी ने जब लडकियो के लिए स्कुल शुरू की, तब उनके स्कुल में कोई भी मातापिता अपनी लडकियॉ भेजने के लिए तैय्यार नही थे! तब अपनी भतीजी” मुक्ता सालवे “को सर्वप्रथम फुलेजी के स्कुल में दाखिल किया और फिर बहुजन समाज के लोगो के घरघर जाकर शिक्षा का महत्व समझाकर उनके लडकियो को अपने दोनो खंदो पर बिठाकर फुलेजी के स्कुल मे सुरक्षित पहुचाने का महान कार्य करनेवाले, भारत देश मे सर्वप्रथम पुणा महाराष्ट्र में यामशाला, युद्धकला प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना कर स्वसंरक्षण एवम देश रक्षण के लिए तत्कालिन अनेक क्रांतिकारकों को युद्धकला का प्रशिक्षण देनेवाले कुशल प्रशिक्षक, “शिक्षित बनो, सशक्त बनो, बलवान बनो!” ऐसा मुल मंत्र समाज को देनेवाले , भारत देश के “आद्य क्रांतियोद्धा,क्रांतिपिता क्रांतिगुरू लहुजी सालवे” इनके १३५ वे पावन स्मृतीदिन पर विनम्र अभिवादन.

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