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लैंगिक हिंसा, बैरागड़ भोपाल: मीडिया और पुलिस की लीपापोती

मधु धुर्वे 

लैंगिक हिंसा

हाल ही में हमारे भोपाल शहर में बच्चों के साथ यौन शोषण जैसी दो गंभीर घटना घटी है. बैरागड़ शासकीय शाला के आवासीय कार्यक्रम में 6 से 11 वर्ष के छोटे लड़के थे. 24 से ज़्यादा ड्राप आउट हुए बच्चों ने अपने परिजनों से बताया की होस्टल का वोर्डन अजय शर्मा उनके साथ लैंगिक और शारीरिक शोषण करता था. स्कूल में क्रूर और विकृत तरीकों की सजाओं के ऊपर यह सब भी किया करता था .

पीड़ित बच्चों द्वारा बताई गई बाते ( 1 .केस बैरागड़ )

सर पूछतेतुम्हें कौनसा जानवर अच्छा लगता है और फिर उस जानवर जैसे मुझे खड़े होने को बोलते

मुझे नंगा कर घंटो मुर्गा बनाया गया और दुसरे बच्चों को पत्थर मारने को बोलामैं मुर्गा बना रहता और वो मेरा आगे पीछे से विडिओ खीचतेबीच रात जब हम सो रहे होते,तो वो दुसरे भैया को बोलते के इन पर ठंडा पानी फेको .नीचे पानी फैककर मज़ाक उड़ाते की सूसू कर दियासुबह नंगा खड़ा करता थाबहार वाले भी आते तो हम अपने आपको ढक नही पाते थेमुझे बहुत शर्म आती थी. छोटे बच्चों को बड़े बच्चों की पेंट खीचने को बोलता था, एक और भैया के लैपटॉप पर लड़कियों की वीडियो दिखाता था, लडकियाँ बोलती थी हमारे नंगे विडिओ देखो.”

बच्चों ने विभिन्न अधिकारियों के सामने बयान दिए हैलेकिन फिर भी लैंगिक हिंसा के केस को दर्ज़ करने में (दिसम्बर 2.12.o16 से ) 6 हफ्ते लग गये . इस केस को दर्ज़ करने में जितनी मैहनत लगी है उसका कोई हिसाब शब्दों के द्वारा देना मुश्किल है क्योंकि जब कोई गरीब आदमी या बस्ती का आदमी न्याय पाने के लिए मेहनत करता है तो उसे न्याय मिलना तो दूर, बल्कि उसे कानून का ही हवाला देकर पुलिसवाले शोषित करते हैं. इंसान को आर्थिक रूप से, भाषा के रूप से, हैशियत के रूप से, और मानसिक रूप से मानो पहले अपने आप को साबित करना पड़ता है न्याय के कटघरे में खड़ा तक होने के लिये.

ये बच्चें दलित, नट, मुसलिम, और आदिवासी समुदाय के बच्चें है और इनके माता पिता मजदूरी तथा पन्नी बीनने का काम करते हैं.

लैंगिक हिंसा, बैरागड़ भोपाल: मीडिया और पुलिस की लीपापोती
लैंगिक हिंसा, बैरागड़ भोपाल: मीडिया और पुलिस की लीपापोती

(बैरागड़ केस) के संधर्भ में पुलिस और शासन के कुछ जवाब

किस आधार पर अश्लील विडिओ बोल रहे हो? विडिओ का सबूत लाओ. (पीड़ितो को )

क्योंकि तुम लोग गंदगी में रहते होतुम लोग को फुंसी हो जाती है, इसलिए तुम्हारी चिंता कर रहा होगा कि (लिंग)पर दवाई लगाई. कम से कम नेहालाता तो थातुम लोग क्या करते थे जो वो ऐसी सज़ा देता (सुझाते हुए कि बच्चों ने कुछ गलत किया होगा) खुद ही वो बच्चा है, और ऐसा केस लगा तो उसकी जिंदगी ख़राब हो जाएगी (आरोपी 25 साल के करीब है) बस इतना ही किया ना? (बलात्कार होता तो और संजदगी से देखा जाता) पैसे की लालच में यह सब कहानी बनाई हैं(क्योंकि माँ बाप गरीब है) .

बैरागड़ केस को बढानें की शुरुआत

मुस्कान नाम की संस्था जो भोपाल शहर में तक़रीबन 20सालो से बस्तियों में बच्चों को पढाने का काम करती है). मुस्कान संस्था अभी कुछ सालो पहले ही गौंड बस्ती से जुडी थी. कुछ पीड़ित बच्चें गौंड बस्ती के है जो उस होस्टल में रहते थे जो कभी कभी मुस्कान के सेंटर में भी टीचरों के साथ बातचित करने आ जाते थेइस घटना के बारे में कुछ पीड़ित बच्चों ने मुस्कान के टीचर को बताया था तब उनके माँ बाप से बात करके घटना की सूचना चाइल्ड लाइन मे केस दर्ज़ की थी.

पोक्सो कानून के तेहत 377 की धारा लगनी थी मगर पोक्सो कानून नही लगाया गया .पुलिस बच्चों का साथ देने की बजाये उल्टा अपराधी का ही साथ दे रही थी. क्यूंकि मुस्कान अकेले पुलिस पे दबाव नहीं बना पा रही थी तो भोपाल के कुछ ९-10 ngo साथ मिल कर एक बच्चों को न्याय दिलाने के लिए एक अलायन्स बनाये. दिनाकं २ फरवरी २०१७ को प्रेस कांफ्रेंस किया गया (अलायन्स की टीम तथा कुछ सामाजिक कार्यकर्तायो ने ) ताकि अपराधी के उपर केस लगाया जाये. तब तक किसी भी तरह की कार्यवाही नही की गई थीजंहा अपराधी रहता है, वंहा की भी जाँच नही हुई थी .

जब बैरागड़ घटना की रिपोर्ट लिखवाने गये थे तो पुलिस ने जल्दी रिपोर्ट नही लिखी बोला सबूत लेकर आओ.इस केस को पुलिस ने (..) थाने में ट्रांसफर कर दियायदि इस घटना की पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट जोड़कर देखा जाये तो बच्चों को गलत ठहराया गया था बयान के दौरान बच्चों के सामने अपराधी को लाया गया थापुलिस ने अपराधी के उपर किसी तरह की जांच नही की थी .ठोस सबूत देने के बाद भी पुलिस उस अपराधी को नही पकड़ रही थी. उसके बाद (अलायंस) की टीम और कुछ संस्था के लोग और अलग अलग बस्ती के लोगों ने मिलकर बच्चों पर होने वाली लैंगिक हिंसा और बच्चों के साथ हुए लैंगिक हिंसा के खिलाफ धरना दिया और प्रदर्शन किया. 21 फरवरी  को सब लोगो ने भोपाल के अलग अलग जगहों पर जमकर प्रदर्शन किया . उसके बाद पुलिस और लोगों में थोड़ी जागरूकता आई तब जाकर उस आरोपी अजय शर्मा को पुलिस ने पकड़ा और बंद कियाफिर इस दौरान ज़मानत के माध्यम से जेल से छूट सकता था मगर कोर्ट ने उसकी ज़मानत खारिज़ कर दी क्योंकि उस अजय शर्मा ने पीड़ित बच्चों के माँ बाप को धमकी दी थीतो अलायन्स की टीम ने उसकी ज़मानत खारिज़ कर वा दीबाद में मीडिया ने इस घटना के बारे में ज़्यादा विस्तार से खबर नही छापीबस उस आरोपी को ज़मानत नहीं मिली ये केहकर इस घटना को भुला दिया.

इतनी बड़ी घटना के बाद भी भोपाल में इसी महीने में दो बड़ी बड़ी घटना घटी जिसमे बच्चियों के साथ बलात्कार और यौनिक हिंसा हुईभोपाल की यह तीनो घटनाये बड़े लोगों द्वारा घटित हुईजिसमे 25 .साल के मर्द, जिसने अपने होस्टल में रहने वाले छोटे ( 6 से लेकर 11 साल लड़कों) के साथ लैंगिक हिंसा की. 35 साल का आदमी ने तीन साल की बच्ची के साथ बलत्कार कियाउसके बाद 65 साल के बुजुर्ग ने छै: साल की बच्ची के साथ यौनिक हिंसा की.

इतना सब होने के बाद भी अभी तक शासन ने कोई दिलासा देने वाली बात तक नही की है बच्चों की सुरक्षा को लेकर. इन घटनाओं से यह ज्ञात होता है की शासन को पहली वाली घटनाओ के आधार पर सही ठोस कार्यवाही करने की जरूरत थीपोक्सो जैसे कानून लागू करने में पुलिस इतनी देरी क्यों करती है ?इन घटनाओ के माध्यम से (मध्यप्रदेश के राज्य भोपाल में ही कितनी शर्मशार करने वाली बात निकलती है की बीते साल प्रदेश में अलग अलग थानों में 2400 मामले दर्ज़ हुए है बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में प्रदेश में भोपाल पहले स्थान पर है यंहा बच्चियों से रेप के 93 मामले दर्ज़ हुए है .यह खुलासा राज्य सरकार की रिपोर्ट से ही हुआ है .

बैरागड़ केस में मीडिया की भागीदारी इस केस में मीडिया ने कुछ ख़ास नजर नही दौड़ाईपत्रिका नाम के एक अखबार में सही जानकारी के साथ छोटी हैडलाइन में बीच के कोने में इस खबर को छपातथा कुछ नामी अखबार दैनिक भास्कर ने तो इस खबर को छापकर इस धटना तथा घटना से जुड़े लोगों की तो जान ही निकाल लीआरोपी को सजा दिलवाने की बाते तो भूल गये मगर मुस्कान नाम की संस्था एक निर्दोष व्यक्ति को सजा दिलाने में कोई कसार नही कर रही ऐसा दैनिक भास्कर ने लिखा अपने अख़बार मेंमीडिया ने ऐसा छाप कर मुस्कान संस्था की छवि बदल दी और अभिव्यक्ति करने वाली बातो को राष्ट्र के खिलाफ बोलने वाले लोगों के दायरे में डाल दिया.

इस माध्यम से हम इसे और स्पष्टता से समझने की कोशिश करेंगे:

मेरा नाम रुचि है मै मुस्कान संस्था में कार्य करती हूँहमारी संस्थाओ के सभी छोटे बड़े कार्यक्रम जैसे मीटिंगवर्कशॉपस्कूल का वार्षिक सम्मलेनबाल मेलायूथ मेला आदि पास स्थित गांधी भवन में होता हैहमारी संस्था का मुख्य उद्देश्य गरीब बच्चों के लिए शिक्षा एंव रोजगारमुखी कार्यक्रम को संचालित करना हैअभी हाल ही में जब हमारे बच्चों के वार्षिकउत्सव को करने के लिए गाँधी भवन बुक करने पहुची तो वंहा की मैडम (जो सब कुछ वंहा के मैंनेजमेंट का देखती है) उन्होंने कहा की अब हमें किसी भी तरह के कार्यक्रम को करने के लिए कलेक्ट्रेड जाकर परमिशन लेनी होगी. मैंने पूछा की ऐसा क्योंतो उन्होंने बताया सरकार को ऐसा लगता है की जितनी भी सरकार विरोधी घटनाये हो रही है वह सब इस भवन में बैठकर मीटिंग करते है एव सरकार व राजनैतिक पार्टी के खिलाफ साज़िस करते है एवं धरनेप्रदर्शन के लिए लोगों की भीड़ इक्कठा कर उन्हें उक्साते है इसलिए किसी भी तरह की बैठककार्यक्रम आदि करने के लिए हमें लिखित परमिशन लेना जरुरी हैदिनाकं 21.2 .17 को अख़बार में नोटिस आया है.”

जब में लेटर लेकर कलेक्टर एस डी एम ऑफिस के पास गई तो उन्होंने कार्यक्रम का पूरा ब्यौरा लेकर हस्ताक्षर किये एव मुझे थाना कोतवाली (सिटी) जाकर साईन करने के लिए कहा. जब में थाना कोतवाली पहुची तो वंहा कुछ देर इंतज़ार करने के बाद सी .एस .पि कोतवाली ने साईन किये एवं वंहा से मुझे श्यामला हिल्स थाना प्रभारी के साईन करवाने के लिए कहा गया. मै दौड़ भाग करके थक चुकी थी पर एक परमिशन लेना और बाकी था. फिर मै श्यामला हिल्स थाना पहुची वंहा मौजूद सिपाही ने मुझसे पूछा कि किस काम से आये हो? मैंने कहा बच्चों के वार्षिक सम्मलेन करवाने के लिए परमिशन लेटर पर साईन करवाने आई हूँतो उस आदमी ने मुझे बड़े कडवे स्वर में जवाब देते हुए कहा की अभी टी.आई साहब लेट आएंगे कल आना अभी यंहा से जाओलेटर लेकर कल आनामैंने उस से कहा की टी.आई सर कितनी देर में आयेंगे बता दीजिये ताकि में उनका इंतज़ार करू क्योंकि में रोंज रोंज एक काम के लिए अपना समय ख़राब नही कर सकतीउस आदमी ने बड़े तेज स्वर में बोला, 2 घंटे लगेंगेमैंने उससे कहा की आप थोड़ा कूल होकर बात करियेअगर आप ड्यूटी कर रहे है तो में भी अपनी संस्था में होने वाले कार्यक्रम की परमिशन मांगने आई हुमैंने इतनी बहस ख़त्म करने के बाद 1 घंटे इंतजार किया फिर T.I आये उन्होंने मेरे लेटर में साईन कियाआखिरकार 10:5 की सुबह से लगभग बजे तक मैंने गाँधी भवन में लेटर जमा करके परमिशन लें ली. इन सब प्रक्रिया से गुज़रने के दौरान मेरे मन में केवल यही सवाल उठा की हमें अपने ही देश में अपने लोगों के बीच अपने विचार अपनी सोच अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का अधिकार छिना जा रहा हैहमसे हमारे सोचने समझने की शक्ति पर अंकुश लगाकर हमें गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा जा रहा है.

घटना दिनांक 2.3.17 “दूसरा केस भोपाल के कोलर क्षेत्र के गिरधर परिसर स्थित नामी प्लेवे स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ यौन शोषण हुआआरोपी एपी सिंह को मंगलवार को देर रात क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लियाइस घटना को घटे पांच दिन हो चुके थे .28 .2 .17 को यह खबर अख़बार में छापी गई है. तथा 24 .2 .17 को बच्ची ने घर वालों को बताया थापिछले पांच दिनों से पुलिस कह रही थी कि सिंह पर लगाये आरोप साबित हो नही रहे हे .पुलिस की ढिलाई पन मंगलवार को दिनभर ख़बरों और सोशल मीडिया ने सवाल पूछे. दबाव पड़ा तो आख़िरकार कार्यवाही करनी पड़ी. (बच्ची के केस के बयान) . गिरफ़्तारी के लिए माँ के बयान काफी हैं हम चाह रहे थे की माँ के सामने एक बार बच्ची से बात हो जाएपुलिस आरोपी को बचने में जुटी थीपुलिस अभियोजन की विवेचना करती है बचाव की नहीये आरोप गलत है .बचाव की नही थीथाना प्रभारी की मिलीभगत थी थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया हैं आगे भी जाँच की जाएगी.

इस केस में कुछ इस तरह कार्यवाही की. नाना ने आरोप लगाया की गिरफ़्तारी में देरी इसलिए हुई क्योंकि आरोपी अनुतोष प्रताप सिंह और कोलार थाना प्रभारी गौरब सिंह बुंदेला के बीच अच्छी दोस्ती है. आरोपों के बाद आईजी के निर्देश पर एसपी ने थाना प्रभारी को देर रात लाइन अटैच करने के आदेश जारी कर दिए गए है.

सोशल मीडिया की क्या प्रक्रिया रही इस केस के दौरान

ट्विंकल ने लिखाहम स्टूडेंट है, लेकिन आज अगर हम स्कूल में भी सेफ नही तो कौन सी जगह सेफ है. हम किस पर विश्वास करे.

टीचर अर्चना रघुवंसी छोटी बच्ची के साथ बहुत गलत हुआ है. दोषी को तुरंत गिरफतार होना चाहिएप्ले स्कूल के प्रबंधको की गिम्मेदारी है की बच्चों की वे बच्चों की हिफाजत कर घर जैसा ख्याल रखे. मगर यंहा उल्टा ही हुआ है.

गृहणी राखी भार्गंव सरकार की योजना पड़ेगा इंडिया तो बढेगा इंडिया …….यैसे घिनौने कृत्य होने से कैसे बढेगा हमारा इंडिया.

नीता मनवानी शिक्षा के मंदिर में ऐसा हो रहा है तो हमारे बच्चें कही सेफ़ नही है इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए.

लोगों में गुसापूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच ऐसे मामले पुलिस को तत्काल जांच पूरी कर आरोपी को कोर्ट में पेश करना चाहिएऐसे मामले में देरी से केस कमजोर होता हैपुलिस को यही मौका है की वह निर्दोष बच्चों और उनके परिजनों के मन में मजबूत भरोसा जगाने वाला एक्शन ले.

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