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एक यूरोपियन महिला का भारत में सफ़र

महिला का सफ़र भारत में फ्रंचेस्का बेनेल्ली, एक इटालियन पर्यटक

भारत में कई अच्छे लोग हैं जिन पर भरोसा कर दोस्ती की जा सकती लेकिन जो गले पड़ने लग जाए उनसे परहेज़ करने में हे समझदारी है. मेरी अन्दर की महिला पर्यटक को इस अतुल्य देश के शोर गुल , खूबसूरती और भीने इन्सानीयत भरे माहौल ने हर स्तर पर विस्मित किया है.

भारत आपके वजूद के गहरायी में बस जायेगा, और आपके होश 0 हव्वाज़ में ऐसा काबू कर लेगा जैसा कोई और देश न कोई दिशा कर पाए.

दुनिया में अकेले घुमने लायक ये सबसे आसान जगह तो नहीं कहला सकती लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत आपके लिए ज़िन्दगी बदलने वाला अनुभव होगा. अगर आपमें खुले मनन और खुश मिजाज़ की खूबी है तो आप भारत के सफ़र का मौका गवाना नहीं चाहेएँगी.

मेरे कारवां में अच्छे , बुरे और बत्तर अनुभव का पिटारा है. ऐसे कुछ तजुर्बों से मिली सीख इखट्टे की हैं ताकि आपका अनुभव अच्छा हे बने.

यूरोपी और भारतीय सभ्यता में ज़मीन आसमान का फर्क है . एक यूरोपी रास्त्र में औरत या आदमी के सिगरेट पीने को ज्यादा रोक टोक नहीं किया जाता. हम औरतों की तीस साल की उम्र होने से शादी की उम्मीद बढ़ नहीं जाती. हम समाज के वो सारें काम जो मर्द करते हैं – यहाँ तक की एकांत में बैठ कर बियर पीना कर सकते हैं. हाँ हो सकता है ये हमारे देश की ठण्ड की वजह से इसे स्वस्थ्य के लिए उतना नुकसान देह नहीं मानते. लेकिन मैं अगर टैटू लगाये अकेले घूमों तो इसका मतलब बिलकुल नहीं की मैं किसी आशिक को ढूंढ रही हूँ.

भारत में इस बात की चर्चा बहुत गंभीरता से की जाती है की आप अकेली लड़की होकर सफ़र कर रही हैं.

जब लोगों को पता लगता है कि आप अकेली अविवाहित महिला हैं तो अनेक बिन मांगे आज्नाबियों से सुझाव सुनने को मिलते हैं. मुझे मंदिर के ९ बार चक्कर काटने को कहा गया, ताकि मुझे अच्छा पति मिल सके. मुझे ज्योतिष के पास भेजअ गया. यहाँ तक कि मुझे पुलिस वाले ने रोका बाइक चलते वक़्त, दारू के लिए नहीं, पर इसलिए कि मेरी शादी नहीं हुई है. इसलिए में एक छोटी अंगूठी पहनती हूँ, ताकि मुझे उल जलूल सवालों से छुटकारा मिले. पर अगर आपकी शादी हो रखी है तो सफ़र आसन रहेगा.

भारत अभी भी बहुत रुढ़िवादी है . चाहे बहुत गर्मी हो, पसीना चू रहा हो , एक बहुत बड़ा दुपट्टा या शाल लगाना, और घुटनों से नीचे तक कपडे पहनना पड़ता है. यहाँ के कुर्ते इस मामले में काम आतें हैं, जो कि बहुत सारे डिजाईन में, खूबसूरत और हवादार होते हैं.

ये बहुत सरे दुकानों में मिल जाते हैं. इन्हें पैन्ट्स या जीन्स के साथ भी पहना जा सकता है. और हाँ धार्मिक स्थानों में ज्यादा टाइट कपडे पहनना उचित नहीं कहलाता. चाहे वो गोवा हो या बीच ज्यादा छोटे कपडे पहनना यहाँ सही नहीं कहलाता. भारतीय पुरुष लाइन लगा के खड़े हो जातें हैं जहाँ भी आप ऐसा करेंगी. हाँ एक औरत खूबसूरत दिखना चाहती है और आज़ादी भी महसूस करना चाहती है, लेकिन इतने लड़कों की झुण्ड से दूर रहने में ही भलाई है, नहीं तो वो आपका पीछा करते रहेंगे.
यहाँ दो तरह के पुरुष मिलेंगे, एक तो वो जो घूरते हैं और दुसरे वो जो शर्म और आदर से आँखे ही नहीं मिला पाते. तो घूरने वालों के साथ वो भी हैं जो आपको बहुत आदर देंगे.

दुसरे देश के होने के नाते अगर आप भारत के तौर तरीके से रहेंगे तो सफ़र अच्छा रहेगा. उनके हिसाब से कपडे, ज्यादा किसी अजनबी से दोस्ती नहीं, और सार्वजनिक स्थान में धुम्रपान न करें. आप जहाँ भी रुकें इस बात का ध्यान रखिये , कि वो साफ़ सुथरा होने के साथ साथ वहां के लोग कैसे हैं. ज्यादा सस्ता होटल लेने के चक्कर में अच्छी वाट लग सकती है. कम चलाऊ लीजिये, होटल मेनेजर, स्टाफ के तौर तरीके को देखते हुए.

कहीं आने जाने के लिए बस, ट्रेन से अच्छा कुछ नहीं है. और जब भी आपको कोई कुछ बेचने आये तो न कहने में बिलकुल संकोच न करें, नहीं तो वो आपके पीछे ही पड़ जायेगा.

भारत भोगोलिक रूप में सुन्दर तो है ही इसकी संस्कृति भी बहुत प्यारी है. आप यहाँ ध्यान करने, पूजा करने या केवल घुमने आ सकती हैं.
बहुत सारी चीजें चौका देने वाली हैं, इसलिए इसके साथ साथ खुले दिमाग और खुशमिजाज होना भी जरूरी है.

यह देश अनेक रंगों से और अंतर्विरोध से भरा हुआ है. कभी ख़ुशी कभी गम लगा रहता है. हाँ का मतलब न और न का मतलब हाँ भी होता है. १० बजे दोपहर, दोपहर शाम भी हो जाता है. एक जगह पहुचने के चक्कर में अनेक जगह भी जान पड़ता है, जो कि कभी कभार रोमच भरा भी होता है.

बस मुस्कुराते, सांस लेते अपना समय लेके जाइए , भारत आपके जीवन को बदल देगा. और सीधे आपकी आत्मा से बात करेगा.

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